संदर्भ:-

यह सब जानते है की कोरोना वायरस को बढने से रोकने के लिए लॉक डाउन का चयन सभी विकल्पों में से सर्वोपरी है, पर यह भी सच ही की लॉक डाउन के करण सभी प्रकार की आर्थिक गतिविधियाँ रोक दी गयी है! परिणामस्वरूप अब यह आशंका हो गयी है की भारत सहित समस्त विश्व की लगभग सभी अर्थव्यवस्थायें मंदी की तरफ अग्रसर हो रही है !

ऐसी स्तिथि में प्रत्येक राष्ट अपने स्तर पर अर्थव्यवस्था को मंदी के प्रभाव से बचाने को अग्रसर है और प्रयास किये जा रहे है! भारत के लिए विशेषज्ञो ने अर्थव्यवस्था में आई मंदी का मुकाबला करने के लिए कृषि क्षेत्र में अधिक निवेश करने और इसके साथ इसके आधुनिकरण की वकालत भी की है विश्व के अन्य देशो की तुलना में भारत में मंदी की यह स्तिथि और भी अधिक चिंताजनक है क्यूंकि पहले ही NSO के अनुसार सकल घरेलु उत्पाद की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2019-20 की अंतिम तिमाही में कम हो कर 4.5% पर आ गयी थी जो की साफ़ साफ मंदी का संकेत दे रही है !

इस आर्टिकल में हम आर्थिक मंदी, आर्थिक मंदी के प्रमुख संकेतको के साथ भारत में मौजूदा कृषि सिथि और इस से संबधित चुनौतियों पर विमर्श करेंगे और साथ ही मंदी के प्रभावों को सिमित करने वाले संभावित विकल्पों का गहराई से विशलेषण भी करेंगे !

क्या होती है आर्थिक मंदी?

साधारण शब्दों में आर्थिक मंदी से अभिप्राय उस स्तिथि से जब अर्थव्यवस्था में लगातार दो तिमाही में आर्थिक वृद्धि की दर नकारात्मक हो तो उसे मंदी की संज्ञा दी जाती है और ऐसी स्तिथि में मांग में भी भारी कमी आती है, रोजगार में कमी या ख़त्म हो जाते है और साथ में बेरोजगारों की संख्या में भी तेजी आती है ! आर्थिक मंदी के कारण मुद्रास्फीति दर में गिरावट आती है !

आर्थिक मंदी का पता लगाने वाले मुख्य कारक:-

1. उपभोक्ता/ग्राहकों की कमी:-आर्थिक मंदी का यह सबसे बड़ा संकेत है की लोक खपत या उपभोग कम कर देते है या बहुत कम करते है इस समय सभी तरह की वस्तुओं की बिक्री में भारी कमी आती है जैसे तेल,साबुन,कपड़ा,धातु जैसी सामान्य बस्तुओ के साथ विभिन्न तरह के वाहनों की बिक्री, घर,जमीन,फ्लैट आदि की बिक्री में भारी कमी आती है !

2. औद्योगिक उत्पादन में भारी कमी:- अर्थव्यवस्था में यदि उद्योग नही चलेगा या उद्योग में नये उत्पाद नही बनेगे तो बहुत ज्यादा नुकसान होगा और इसमें निजी क्षेत्रो की बहुत बड़ी भूमिका होती है मंदी के इस दौर में उद्योगों के उत्पादन कम हो जाता है या बिलकुल ही ख़त्म हो जाता है उद्योगों मिलो और फैक्ट्रियां बंद हो जाते है ,और इनके बंद होने का एक मुख्य कारण मांग का कम होना है !

3. बेरोजगारी दर में बढोत्तरी :- अर्थव्यवस्था में मंदी आने पर रोजगार के अवसर कम हो जाते है या बिलकुल ख़त्म ही जो जाते है क्यूंकि मांग न होने से उत्पादन नही होगा और उत्पादन न होने से उद्योग बंद हो जाते है जिसके कारण कंपनी अपने कर्मचारियों की छंटनी करना आरम्भ कर देती है जिस से बेरोजगारी बढ़ जाती है !

4. निवेश के साथ साथ बचत में कमी:- मंदी के इस समय में निवेश बहुत कम हो गया है इसका मुख्य कारण आप सभी जानते है क्यूंकि लोगो की कमाई बहुत कम हो गयी है और जिससे उनकी क्रय अर्थात खरीदने की क्षमता में कमी आ गयी है और इसी कारण से वो बचत करने में भी असमर्थ हो रहे है अगर बचत और निवेश में कमी आये तो यह बाजार में तरलता को घटा देती है !

5. शेयर बाजार में गिरावट होना :- मंदी के कारण शेयर बाजार में भी भारी उतार चढाव देखा जाता है शेयर बाजार में उन्ही कम्पनियों के शेयर बढ़ते है जिनकी कमाई और लाभ बढ़ रहा हो यदि कम्पनियों के मुनाफे का अनुमान लगातार कम हो रहे है और वे उम्मीदों पर खरा नही उतर पा रही !

भारत में कृषि की वर्तमान स्तिथि:-

1. अगर बात करे आंकड़ो की तो आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 के अनुसार भारतीय आबादी का एक बड़ा हिस्सा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अन्य क्षेत्रो की तुलना में रोजगार के अवसरों के लिए कृषि क्षेत्र पर अधिक निर्भर है!
इन आंकड़ो के मुताबिक देश में चालू कीमतों पर सकल मुल्यवर्द्धन में कृषि और सहायक क्षेत्रो का हिस्सा वर्ष 2014-15 के 18.2% से गिरकर वर्ष 2019-20 में 16.5 प्रतिशत हो गया है

2. हमारे देश में लाखो ग्रामीण परिवार ऐसे है जिनका कृषि के बाद आय का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण साधन पशुधन है किसानो की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में पशुधन की भी महत्वपूर्ण भूमिका है पिछले पांच वर्षो के दौरान पशुधन क्षेत्र 7.9% की औसत वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है!

भारत में कृषि क्षेत्र की चुनोतियाँ:-

1. पहले के समय में भारत में कृषि क्षेत्र से संबंधित रणनीति मुख्य रूप से कृषि उत्पादन बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केन्द्रित थी जिसके कारण किसानो की आय में वृद्धि करने पर ध्यान नही दिया गया था !
पिछले कुछ वर्षो में हरित क्रांति को अपनाने के कारण भारत में खाद्य उत्पादन और जनसख्याँ में कई गुणा वृद्धि हुई है पर किसानो की आय में वृद्धि से संबंधित आंकड़े बहुत ही निराशाजनक है !

2. वर्तमान में कोरोना वायरस के बढने के कारण और इसे बढने से रोकने के कारण किये गये लॉक डाउन से कृषि गतिविधियाँ पूरी तरह से ठप पड़ी है 

3. लाखो किसानो के खेतो में फसल पक के तैयार हो चुकी है पर उसे काटने के लिए मजदूरों का आभाव है जिस से किसान खुद से फसल को काटने में असमर्थ है 

4. किसानो ने खुद हिम्मत कर के फसल काट भी ली तो उसे बाजार या मंडियों तक पहुँचाने के लिए परिवहन के साधन नही मिल रहे है 

आर्थिक मंदी को दूर करने के लिए कृषि क्षेत्र का योगदान:-

1. सब जानते है की भारत में 55 फीसदी से ज्यादा लोगो की आजीविका का मुख्य स्त्रोत कृषि व उस से संबंधित अन्य गतिविधियाँ है, इस कोरोना महामारी के कारण अगर इस लॉक डाउन को केवल कृषि से संबंधित कार्यो के लिए छुट दी जाये तो इस क्षेत्र से संम्बन्धित लोगो के सामने रोजगार की समस्या दूर हो जाएगी!

2. भारत में कृषि से संबंधित गतिविधियों के प्रारम्भ होने से कच्चे उत्पादों पर निर्भर उद्योगों को सोशल डिसटेंसिंग का पालन सुनिश्चित कराते हुए प्रारम्भ किया जा सकता ताकि सिमित मात्र में ही सही उत्पादन किया जा सके !

3. दुग्ध उत्पादन और पशुपालन से कृषि की एक तिहाई आय होती है पशुओं के आहार और दवाईयों का उत्पादन करने वाले उद्योगों को भी शुरू करना चाहिए !

4. कृषि उत्पादों के उत्पादन को प्रोत्साहन देना चाहिए जिन्हें हम विश्व के अन्य देशो में निर्यात कर सकते है !

निष्कर्ष:-

सभी जानते है की वैश्विक लॉक डाउन के कारण मंदी की स्तिथि और भी ज्यादा गम्भीर हो गयी है पर सही तरह से प्रयास कर के हम अर्थव्यवस्था को बचा सकते है हमे अपने ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर अधिक ध्यान देना होगा !