संदर्भ:-

जैसा की आप जानते है की मलेशिया में मोहिउद्दीन यासीन के नेतृत्त्व वाली सरकार ने अपना कार्यभार सम्भाल लिया है,मोहिउद्दीन यासीन को मलेशिया का नया प्रधानमंत्री नामित करने के साथ ही पूर्व सत्ता में रहने वाले गठबंधन के टूटने और महातिर मोहमद के इस्तीफे के बाद चल रहा राजनितिक संकट समाप्त हो गया, मलेशिया की नई सरकार भारत के साथ अच्छे सम्बंध बनाना चाहती है !

इसके अलावा मलेशिया की नई सरकार को अपनी विदेश निति में इस्लामिक बयानबाजी का विरोध करने की आवश्यकता होगी, क्यूंकि ऐसा न करने से भारत जैसे अन्य देशो के साथ उसके सम्बन्ध बहुत ख़राब या जटिल हो सकते है जैसा की आपको पता ही है इस से पहले मलेशिया की पूर्व प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद द्वारा जम्मू-कश्मीर और NRC कानून को लेकर विवादित ब्यान दे कर दोनों देशो के बीच दूरियों को बढ़ा दिया था, इसका परिणाम यह हुआ था की भारत ने मलेशिया से पाम आयल के आयत पर प्रतिबंध भी लगा दिया था !

इस लेख में हम मुख्यता भारत और मेलशिया के संबंधो की एतिहासिक पृष्ठभूमि के साथ, दोनों देशो में सम्बधो में खटास के कारण तथा सहयोग के विभिन्न क्षेत्रो पर विमर्श करने का अधिक प्रयास किया जाएगा !

पृष्ठभूमि:-

इतिहास पर प्रकाश डाले तो वर्ष 1962 में भारत और चीन युद्ध में मलेशिया एकमात्र ऐसा दक्षिण-पूर्वी देश था जिसने भारत का खुल कर समर्थन किया और साथ दिया था इसके अलावा भारत को युद्ध में सहायता देने के लिए एक आर्थिक कोष की भी स्थपना की थी !

आपको याद होगा जब 1965 में मलेशिया और इंडोनेशिया का विवाद हुआ था तो भारत ने भी खुल के मलेशिया का साथ दिया और इसके चलते भारत और इंडोनेशिया के रिश्तो में खटास आ गयी थी !

शीत युद्ध के दौरान दोनों ही देश गुट निरपेक्ष देशको के दल के साथ रहे और उन्होंने पारम्परिक संबधो को भी अधिक मजबूत बनाये रखा, एक मुस्लिम देश होने और पाकिस्तान की तमाम कोशिशो के बावजूद मेलशिया और भारत के सम्बन्ध बहुत अच्छे बने रहे !

भारत की सरकार ने वर्ष 1992 में लुक ईस्ट निति से आपसी सम्बन्धो को नये आयाम दिए और वर्ष 2014 में चुनी गयी नई सरकार ने कूटनीति के अगले चरण में मलेशिया समेत अन्य पूर्वी एशियाई देशो में पहल करते हुए लुक ईस्ट निति को एक्ट ईस्ट निति में बदल दिया, आपको बता दे की मलेशिया भारत सरकार की एक्ट ईस्ट निति के केंद्र में है !

अगर बात करे मलेशिया में भारतीय जनसंख्या की तो मलेशिया में लगभग 24 लाख भारतीय रहते है जो इसकी कुल जनसंख्या के 8 प्रतिशत है !

भारत और मलेशिया के बीच विवाद के कारण:-

दोनों देशो के मध्य विवाद की सबसे बडी वजह भारत में टेरर फाइनेंस के मुख्य आरोपी जाकिर नाइक के मलेशिया भाग जाने और भारत सरकार की तमाम कोशिशो और दोनों देशो के मध्य प्रत्यपर्ण संधि होने के बावजूद मलेशियाई सरकार के उसे भारत नही भेजने के निर्णय के कारण दोनों देशो के मध्य राजनयिक स्तर पर पिछले कुछ वर्षो से तनाव की स्तिथि पैदा कर दी है !

बात वर्ष 2018 की जब महातिर मोहम्मद के सत्ता पर काबिज होने के बाद भारत के लिए बहुत सारी परिस्तिथियां कठिन कर दी थी, भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और भारतीय विदेश मंत्रालय की गुजारिश के बाद भी महातिर मोहम्मद ने जाकिर नाइक को भारत भेजने के लिए इनकार कर दिया था और कहा की भारत में जाकिर नाइक को जान का खतरा हो सकता है!

इसके अलावा UNO में कश्मीर पर ब्यान देकर मलेशिया ने पाकिस्तान से बढती करीबी और भारत से सम्बन्धो पर पड़ते इसके असर को उजागर किया था !

उस समय के मलेशियाई प्रधानमंत्री ने सयुंक्त राष्ट्र संघ की बैठक में कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए कहा की भारत ने कश्मीर पर आक्रमण कर उसे कब्जे में कर रखा है, जो संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतो के विरुद्ध है !

पाम तेल और भारत सरकार:-

मलेशिया की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पाम आयल के व्यवसाय पर निर्भर करती है! कहा जाता है की भारत में खाने में प्रयोग किया जाने वाले तेल में पाम आयल के तेल का हिस्सा दो तिहाई है

भारत  पाम आयल के मामले में अभी तक आत्मनिर्भर नही हुआ है भारत को पाम आयल की अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है भारत में खपत होने वाले कुचल पाम आयल का लगभग 70% विदेशो से आता है!

अगर बार अन्य आंकड़ो की करे तो भारत में लगभग 90 लाख टन पाम आयल का आयात होता है और यह मुख्य रूप से मलेशिया और इण्डोनेशिया से आयात होता है!

भविष्य का रास्ता :-

मलेशिया एक ऐसा देश है जंहा लगभग 8 प्रतिशत आवादी भारतीय मूल ही है ऐसी स्तिथि में भारत और मलेशिया के मध्य एक मजबूत विदेश निति का होना एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है!

ऐसे में भारत को धैर्य का परिचय देते हुए मलेशिया के साथ अपने सभी सम्बधो को परिभाषित करना होगा और दूसरी तरफ मलेशिया को भी यह प्रयास करना होगा की उनकी घरेलु राजनीती भारत जैसे पड़ोसी देशो के साथ ख़राब संबध की नीव पर न स्थापित न हो !