संदर्भ:-

जैसा की आप जानते है की भारत अपनी जरूरत का ६५% गैस और कच्चा तेल खाड़ी राष्ट्रों से लेता है, आपको इस बात का भी बोध होना चाहिए की इन खाड़ी क्षेत्रो में लगभग ९० लाख प्रवासी भारतीय निवास करते है और जो ४५ बिलियन डॉलर की धनराशी भारत भेजते है! कोरोना महामारी के बढ़ते प्रसार ने मानवीय गतिविधियों के साथ साथ सभी तरह की गतिविधियों को बंद करवा दिया है और इसके अलावा कच्चे तेल के मूल्य में गिरावट से खाड़ी देशो में भारी मार पड़ी है, इस मार के खतरे को संतुलित करने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों की जरूत है! अगर बात करे हमारे देश की तो प्राचीन काल से ही भारत के खाड़ी देशो क साथ मधुर और महत्वपूर्ण संबंध रहे है ! खाड़ी राष्ट्रों के साथ भारत के न केवल व्यापारिक संबंध रहे है बल्कि सांस्कृतिक और राजनैतिक संबंध भी है, जैसा की हमने आपको ऊपर बताया की भारत के लाखो लोग इन सभी खाड़ी राष्ट्रों में काम कर रहे है, और इस कोरोना वायरस की स्तिथि में न सिर्फ वंहा के लोगो को असुविधा हो रही है बल्कि भारतीय लोगो को इस मुसीबत की घडी इ विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है !

इस आर्टिकल में हम भारत और खाड़ी राष्ट्रों के बीच संबंधो की पृष्ठभूमि पर विस्तार से चर्चा और विमर्श करेंगे और साथ ही विभिन्न चुनौतियों और खाड़ी राष्ट्रों के प्रति भारत की विदेश निति की गहन समीक्षा करेंगे!
क्या है खाड़ी राष्ट्रों का इतिहास?

जब भी खाड़ी राष्ट्रों की बात आती है तो हमारे दिमाग में सबसे पहले मुख्य रूप से कुवैत, सऊदी, UAE कतर और ओमान जैसे देशो के नाम आते है ये ६ राष्ट्र खाड़ी सहयोग परिषद के संस्थापक सदस्य है
और इस सभी राष्ट्रों की सीमाये फारस की खाड़ी में मिलती है इसीलिए इन देशो को सामूहिक रूप से खाड़ी देश के रूप में जाना जाता है 

आपको यह जान कर भी हैरानी होगी की ईरान व इराक की भी सीमा फारस की खाड़ी से मिलती है और खाड़ी देशो में इनकी गिनती होती है पर ये दोनों देश खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य नही बन पाए है इसके पीछे मुख्य कारण इन दोनों देशो की सामाजिक आर्थिक और राजनैतिक गतिविधियां है!

Gulf Cooperation Council-GCC:-

1. GCC अरब प्रायद्वीप में ६ देशो का एक राजनैतिक और आर्थिक गठबंधन है जिसमे सऊदी अरब,UAE कुवैत, ओमान, कतर देश शामिल है 

2. साल १९८१ में गठित GCC ६ देशो के मध्य आर्थिक सांस्कृतिक और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देती है और सहयोग तथा क्षेत्रीय मामलो पर विचार विमर्श करने के लिए प्रत्येक साल एक शिखर सम्मेलन का आयोजन करता है !

3. सुरक्षा विशेषज्ञ GCC को अरब नाटो की संज्ञा दी है 

4. GCC का मुख्यालय रियाद सऊदी अरब में है 

5. GCC की कार्य संचालन की भाषा अरबी है 

खाड़ी राष्ट्रों के सामने चुनौतियाँ:-


  • वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण वैश्विक लॉक डाउन से हाइड्रोकार्बन की खपत में कमी आ गयी है !
  • एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार लॉक डाउन के बाद कच्चे तेल के उपभोग में रोजाना ३० मिलियन बैरल की गिरावट दर्ज की गयी है 
  • अगर बात करे राजकोषीय घाटे की तो वर्ष २०२० में सऊदी अरब का राजकोषीय घाटा ८ प्रतिशत से ज्यादा होने की संभावना है !
  • कोरोना वायरस के कारण खाड़ी देशो में आयोजित होने वाले हज और उमरा जैसे धार्मिक कार्यक्रमों को भी स्थगित कर के रखा हुआ है!

भारत के सामने चुनौती:-

  • वैश्विक महामारी के कारण चुनौती केवल खाड़ी देशो को ही नही है बल्कि इस कोरोना महामारी से भारत के सामने भी बहुत सारी चुनौतियाँ है वैश्विक महामारी covid-१९ के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है और इसका सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा, जैसा की आप सभी जानते है की भारत सबसे ज्यादा कच्चे तेल का आयात सऊदी अरब से ही करता है !
  • खाड़ी राष्ट्रों में सबसे ज्यादा भारतीय श्रमिक काम करते है और मेने आपको इस लेख के प्रारंभ में ही बताया है की इन खाड़ी देशो में भारत के विभिन्न राज्यों से लगभग ९० लाख लोग काम करते है और भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा को भारत भेजते है !
  • इस वैश्विक बिमारी से उभरी परिस्तिथि में नये कूटनीतिक तालमेल बिठाने की जरूरत है !
  • अभी हाल ही में चाइना ने covid-१९ महामारी पर नियंत्रण पाया जा सका है ऐसे में चीन अपनी सॉफ्ट पॉवर का प्रयोग कर के खाड़ी देशो को पहुंचाई गयी सहायता उसे उन्य देशो के मुकाबले चीन को नजदीक ला सकती है !

भारत के लिए इन सभी देशो के लिए महत्त्व:-

  • Financial Year 2018-19 में भारत और खाड़ी राष्ट्रों के मध्य १६२ बिलियन डॉलर का यापार हुआ है, यह एक वर्ष में भारत के द्वारा पुरे विश्व के साथ किये जाने वाले व्यापर का २०% है!
  • सभी खाड़ी देशो में भारत के ९० लाख लोग काम करते है और वंहा से प्रत्येक वर्ष ४० बिलियन डॉलर को भारत भेजते है !
  • खाड़ी राष्ट्र हमारी विकास की जरूरत जैसे ऊर्जा संशाधन कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए निवेश के अवसर और लाखो लोगो को नौकरी के भरपूर अवसर देता है!

भविष्य के लिए रास्ता :-

भारत को खाड़ी देशो के साथ समन्वय के लिए नए रास्तो को खोजने की आवश्यकता है यह खोज स्वास्थ्य सेवा में सहयोग के साथ शुरू हो सकती है और धीरे-२ दवा अनुसन्धान और उत्पादन भारत में बुनियादी ढांचे के निर्माण और तीसरे देशो में कृषि श्हिक्षा और कौशल के साथ साथ अरब सागर में निर्मित गतिविधियों की ओर बढ़ सकती है!

भारत को इस संकट की स्तिथि से बहार निकलने के लिए अपनी एक्ट वेस्ट निति को आगे बढ़ाना चाहिए