संदर्भ:-

कोरोना महामारी का प्रभाव पुरे विश्व में है और पूरा विश्व COVID-19 से पैदा होने वाली चुनौत्तियो से निपटने में हरसम्भव प्रयास कर रहा है पर दूसरी तरफ इस बीमारी का जन्मदाता देश चीन दक्षिण चीन सागर में अपनी सैन्य गतिविधियों को संचालित कर इस क्षेत्र से जुड़े हुए राष्ट्रों के सामने चुनौती पेश कर रहा है! कुछ दिन पहले चीन के द्वारा इस संवेदनशील क्षेत्र में सैन्य अभ्यास के आयोजन के साथ बड़ी मात्र में सैन्य टुकडियो की तैनाती भाई कर दी है, और चीन यंही तक नही रूका बल्कि वियतनाम के विदेश मंत्रालय के अनुसार कुछ दिन पहले ही चीन ने तटरक्षक बल के एक पोत द्वारा दक्षिण चीन सागर के पार्सल द्वीप समूह में वियतनाम की मछली पकड़ने वाली नौकाओ को पानी में डुबोने का प्रयास भी किया था, चीन के द्वारा ऐसा करने से वियतनाम की संप्रभुता का उल्लंघन कर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है !

यह बात सब जानते है की दक्षिण चीन सागर विश्व के सबसे व्यस्त जलमार्गो में से एक है और यह ब्यापार तथा परिवहन के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है, दक्षिण चीन सागर में स्तिथ विभिन्न देशो के मध्य इस क्षेत्र में अपना वर्चस्व स्थापित करने को लेकर तनाव बहुत है! जैसा की आप सभी जानते है की चीन का अपने सभी पड़ोसी देशो के साथ विवाद रहता है और यंहा भी चीन से लगे दक्षिण पूर्वी एशियाई देशो और उनके द्वीपों को लेकर भी चीन और वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, ब्रुनेई आदि देशो के साथ विवाद है !

भौगोलिक स्तिथि:-

दक्षिण चीन सागर प्रशांत महासागर के पश्चिमी किनारे से जुड़ा हुआ है और या सागर एशिया के दक्षिण पूर्व में स्तिथ है !

यह सागर चीन के दक्षिण में स्तिथ एक सीमांत सागर है जो सिंगापुर से लेकर ताइवान की खाड़ी तक लगभग ३.५ मिलियन वर्ग किलोमीटर क्षेत्रमे फैला है और इसमें पार्सल जैसे द्वीप समूह शामिल है !

दक्षिण चीन सागर के आस पास इण्डोनेशियाई करिमता प्रायद्वीप, मलक्का फारमोसा जलडमरूमध्य और मलय सुमात्रा प्रायद्वीप आते है , दक्षिण चीन सागर के दक्षिणी हिस्से की बार करे तो यह हिस्सा चीन की मुख्य भूमि को छूता है और इसका दक्षिणी पूर्वी हिस्से पर ताइवान की दावेदारी है !

 इस सागर का पूर्वी हिस्सा वियतनाम और कंबोडिया को स्पर्श करते है, दक्षिण चीन का पश्चिम हिस्सा फिलीपींस को स्पर्श करता है और दक्षिण  चीन सागर के उत्तरी इलाके में इंडोनेशिया के बंका और बैतुंग द्वीप है!

इतिहास या विवादित इतिहास :-

सबसे पहले साल 1947 में मूल रूप से चीन गणराज्य की कुओमितांग सरकार ने इलेवन डैश लाइन के माध्यम से चीन सागर में अपने दावे को प्रस्तुत किया था 

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा मुख्य भूमि चीन पर अधिकार करने और साल १९४९ में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना का गठन के बाद टोकिन की खाड़ी को इलेवन डैश लाइन से बाहर कर दिया, इसका परिणाम यह हुआ की इलेवन डैश लाइन को अब नाइन डैश लाइन से जाना जाता है !

चीन सरकार द्वारा साल १९५८ के घोषणापत्र में ९ डैश लाइन के आधार पर दक्षिण चीन सागर के द्वीपों पर अपना दावा किया था, चीन के इस दावे से वियतनाम के पार्सल द्वीप समूह नाइन डैश लाइन के अंतर्गत आ गये जो की चीन और वियतनाम के विवाद का मुख्य कारण बन गया !

इस तरह नाइन डैश लाइन में फिलीपींस का स्कारबोरो शोल द्वीप शामिल हो गया और इसके साथ ही इण्डोनेशिया का नातुना सागर भी इस में शामिल हो गया !

दक्षिण चीन सागर में विवादों के मुख्य कारण:-

दक्षिण चीन सागर में विवाद के मुख्य कारण समुद्र पर विभिन्न क्षेत्रो का दावा और समुद्र का क्षेत्रीय सीमांकन है, चीन दक्षिण चीन सागर के ८०% से ज्यादा हिस्से को अपना मानता है और यह एक ऐसा सागर क्षेत्र है जंहा प्राकृतिक तेल और गैस भारी मात्र में उपलब्ध है 

मछली व्यापार में शामिल राष्ट्रों के लिए यह जलीय क्षेत्र बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है और साथ ही में इसकी भौगोलिक स्तिथि के कारण इसका सामरिक महत्व भी बढ़ जाता है यही कारण है की चीन इस विवादित क्षेत्र में अपना स्वामित्व रखना चाहता है !

इससे क्या प्रभावित हुआ ?

दक्षिण चीन सागर ने इस विवाद में शामिल क्षेत्रो को प्रतिकूल रूप से भारी मात्र में प्रभावित किया है इंडोनेशिया,फिलिपीन सहित सभी देशो का चीन के साथ व्यापार प्रभावित हुआ है, जैसा की हमने आपको उपर भी बताया है की दक्षिण चीन सागर सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गो में से के है और अगर इस क्षेत्र में विवाद ऐसा ही रहा तो शिपिंग के साथ साथ आर्थिक गतिविधियां बहुत प्रभावित होगी!

अगर बात करे पूर्वी एशिया की तो यंहा अमेरिका की व्यापक सुरक्षा प्रतिबद्धतांयें है क्यूंकि अमेरिका ने इस क्षेत्र के विभिन्न देशो के साथ सुरक्षा गठबंधन कर रखे है इसलिए इस क्षेत्र के साथ विवाद सीधे सीधे अमेरिका के साथ विवाद होगा !

ऊर्जा संबंधी चीन की सुरक्षा रणनीति:-

चीन की प्राकृतिक तेल की आपूर्ति मध्य पूर्व के देशो द्वारा मलक्का जलडमरूमध्य क्षेत्र के रास्ते होती है और अमेरिका चीन को हमेशा चेतावनी देता रहता है की चीन मलक्का जलडमरूमध्य क्षेत्र वाले रास्ते को ब्लाक कर दे और इसका परिणाम यह होगा की चीन की ऊर्जा आपूर्ति रूक सकती है !

यह क्षेत्र ऐसा है जंहा हर वर्ष ५ ट्रिलियन डॉलर का इंटरनेशनल ट्रैड होता है क्यूंकि यंहा पर स्तिथ महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गो के जरिये इंटरनेशनल ट्रैड में आसानी होती है !

और आपका यह जानना भी बहुत जरूरी है की इस क्षेत्र में सिर्फ तेल और गैस ही नही बल्कि दक्षिण चीन सागर में मछलियों की हजारो नस्ले पाई जाती है, अगर बात करे दुनिया भर में मछली कारोबार की तो ५५% मछलियों का कारोबार इस क्षेत्र में होता है इसलिए चीन इस क्षेत्र में अपनी बहुत अधिक दिलचस्पी रख रहा है और रखता आया है !

इस विवादित क्षेत्र में भारत की क्या भूमिका रही है?

दक्षिण चीन सागर विवाद में भारत का मानना है की दक्षिण चीन सागर विवाद में शामिल क्षेत्र के सभी देशो को किसी भी प्रकार की धमकी और बल प्रयोग किये बिना आपसी इस विवाद को हल कर देना चाहिए क्यूंकि अगर ऐसा नही होता है तो न चाहते हुए भी मुश्किले पैदा होती रहेगी !

भारत दक्षिणी पूर्वी देशो जैसे वियतनाम, फिलिपीन जैसे देशो के साथ सैन्य साजो समान के आयत और निर्यात की गतिविधियाँ निरंतर बढ़ा रहा है इस तरह भारत पूर्वी एशिया मुख्यता चीन के साथ विवाद में उलझे हुए देशो के महत्वपूर्ण सैन्य भागीदारी के रूप में उभर रहा है !

निष्कर्ष:-

निष्कर्ष में हम यह कह सकते है की भारत को चीन और पूर्वी एशियाई देशो विशेषकर दक्षिण चीन सागर विवाद में उलझे देशो के साथ अपने अच्छे और मधुर संबंध रखते हुए कुटनीतिक दृष्टि से अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है ताकि इन देशो के मामले में प्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप किये बिना अपने आर्थिक और राजनीतिक हितो की आपूर्ति की जा सके!