संदर्भ:-

हिन्द महासागर के बारे में ये कहा जाता है की जिसका हिन्द महासागर पर नियंत्रण है, उसी का समस्त एशिया पर प्रभुत्व है ! अल्फ्रेड थेयर महान के शब्दों के अनुसार हिन्द महासागर क्षेत्र के महत्व को स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है, थेयर के इस कथन से न केवल हिन्द महासागर के एतिहासिक महत्व का पता चलता है बल्कि उसके भू-राजनितिक महत्व का भी पता चलता है!


आपको याद होगा जब 2008 में भारत के मुम्बई में हुए आंतकवादी हमले ने भारत की छवि को काफी ख़राब किया था, और इस आंतकवादी हमले के बाद भारत की तटीय सुरक्षा व्यस्व्था और महासागरीय क्षेत्र की बेहद सिमित जानकारी की चिंताजनक स्तिथि हम सब के सामने आई थी!

इस लेख में हम हिन्द महासागर की भोगोलिक स्तिथि को समझने क साथ साथ इसके भू-राजनितिक महत्व को भी समझने का प्रयास करेंगे और हिन्द महासागर में भारत की रणनीति को ज्यादा बढ़ाने के विभिन्न सुझावों पर भी विचार विमर्श करेंगे!

भौगोलिक स्तिथि:-

हिन्द महासागर विश्व का तीसरा सबसे बड़ा जल क्षेत्र है तथा इसमे धरती की सतह का उपलब्ध जल का लगभग 20% भाग इसमें स्तिथ है ! हिन्द महासागर उत्तर में भारतए उपमहाद्वीप से, तथा पश्चिम में पूर्वी अफ्रीका, पूर्व में चीन, सुंडा द्वीप समूह और ऑस्ट्रेलिया तथा दक्षिण में दक्षिण धुवीय महासागर से घिरा हुआ है !
हिंद महासागर भारत को दक्षिण-एशिया, दक्षिण प्रूव एशिया अफ्रीका पश्चिम एशिया और ओशियन तक पहुंच प्रदान करता है!

हिन्द महासागर मछली पकड़ने के साथ साथ खनिज संसाधनो के लिए एक मूल्यवान स्त्रोत है 
इस क्षेत्र की उभरती हुई शक्ति:-

आबादी की नजर से:-

हिंद महासागर क्षेत्र में लगभग 2.6 बिलियन लोगो का निवास स्थान है जो पुरी दुनिया की आवादी का एक तिहाई से भी ज्यादा है, इस क्षेत्र में विश्व के दो सबसे बड़ी आवादी वाले देश है चीन और भारत !

आर्थिक की दृष्टि से :-

दुनिया के कच्चे तेल के व्यापार का 92% परिवहन हिंद महासागर के चोक पॉइंट के रूप में जाने वाले जल के तीन मार्गो से होकर जाता है, फारस की कड़ी और ओमान की कड़ी के बीच स्तिथ होर्मुज का जलडमरूमध्य शामिल है जो फारस की खाड़ी से हिंद महासागर तक एक मात्र समुद्री मार्ग प्रदान करता है, हिंद महासागर क्षेत्र में पड़ने वाले राष्ट्र भारत विश्व में शबे तेजी से बढती हुई अर्थव्यवस्था है, और आपको यह भी पता होगा की आने वाले दशको में यह विश्व की सबसे बड़ी आबादी और सबसे अधिक क्षमता वाला देश भी होगा

राजनीती की नजर से:-

हिंद महासागर की विशेषता के बारे में जान ने के बाद आपको ये पता होना चाहए की हिन्द महासागर समारिक प्रतियोगिता का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनते जा रहा है चीन इस क्षेत्र में लाखो अरबो डॉलर का निवेश कर रहा है और इस निवेश से चीन हिन्द महासागर के सीमावर्ती देशो में अपनी सामरिक बढत को और भी अधिक बनाना चाहता है!

हिन्द महासागर में हमारे पड़ोसी देश चीन की भूमिका:-

चीन के बारे में आप सभी अच्छी तरह से परिचित है, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है की चीन लगातार इस क्षेत्र में अपनी नौसेन्य शक्ति को अधिक मात्र में बढ़ा रहा है, चीन ने श्रीलंका, पाकिस्तान और अब जिबूती में भी नौसेन्य चौकी स्थापित कर रहा है

चीन की आर्मी गैर शान्ति अभियानों के लिए हिन्द महासागर क्षेत्र में स्थापित अपने सभी नौसेन्य बेस में रसद आपूर्ति की विस्तार योजनाओ पर काम कर रही है जिसमे भारतीय नौसेना के हितो के साथ टकराव की सम्भावना है 

चीन भारत की कच्चे तेल और उर्जा से संबंधित सप्लाई लाइन को काट सकता है क्यूंकि चीन जिबूती में स्थापित नौसेन्य बेस के द्वारा हिंद महासागर में स्तिथ परिवहन मार्गो को अपने नियन्त्रण में कर सकता है !

चीन अपनी "स्ट्रिग ऑफ़ पर्ल" निति के अनुसार भारत को घेरते हुए हिन्द महासागर में स्तिथ देशो में अपने नौसेन्य अड्डे बना कर भारत पर अपनी सामरिक बढत हासिल कर सकता है !

हिंद महासागर में हमारे देश की स्तिथि:-

हिन्द महासागर क्षेत्र के सम्बन्ध में भारत की निति में पिछले कुछ सालो में बदलाव आया है भारत की निति इस क्षेत्र के बारे में अलगाव की थी परन्तु अब हिंद महासागर क्षेत्र के लिए भारत की निति भारतीय सामुद्रिक हितो से परिचालन हो रही है!

Security and Growth for all in the Region-SAGAR पहल द्वारा भारत इस क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा पर अधिक जोर दे रहा है और इसके अतिरिक्त सागरमाला परियोजना पर भी कार्य कर रहा है, ताकि भारत अपनी तटीय अवसरंचना को मजबूत करके अपने क्षमता में वृद्धि कर सके !

ऐसा करने से भारत न सिर्फ हिंद महासागर क्षेत्र में अपने हितो की रक्षा कर पायेगा बल्कि ब्लू इकॉनमी के लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकेगा ! इस ब्लू इकॉनमी पर अधिक बल देने के लिए हिंद महासागर क्षेत्र के महत्व को देखते हुए नई सरकार ने अपने शपथ ग्रहण में बिम्सटेक देशो को आमंत्रित किया था !

सागर पहल:-

Security and Growth for all in the Region-SAGAR पहल वर्ष 2015 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौरिशिस यात्रा के दौरना नीली अर्थव्यवस्था पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए है ये सिद्धांत 
यह एक समुद्री पहल है जो हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की शांति स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए हिन्द महासागर क्षेत्र को प्राथमिकता देती है !

हिंद महासागर के क्षेत्रीय सहयोग संघ:-


  • साल 1997 में हिंद महासागर क्षेत्रीय सहयोग संघ की स्थापना की गयी 
  • हिंद महासागर के सीमावर्ती 22 देश इस संघ के सदस्य है 
  • इसका मुख्यालय माँरिशस के इबेन शहर में स्थापित है 
  • इसके सदस्य देशो के नागरिको की आबादी लगभग 3 बिलियन है 

उद्देश्य:-

इस क्षेत्र के सदस्य देशो के स्थायी विकास एवं संतुलित प्रगति को बढ़ावा देना तथा क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग के लिए साझी जमीन सृजित करना 

आर्थिक सहयोग के ऐसे क्षेत्रो पर बल देना जो साझे हितो के विकास के लिए तथ परस्पर लाभ प्राप्त करने के लिए अधिकतम अवसर प्रदान करते है !